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DIRTY कौन वो या हम?

हप्ते बीत जाने के बाद के बाद मंडे को द डर्टी पिक्चर देखी वो भी मॉर्निंग षो मगर पीवीआर की ऑडी हाउसफुल थी। ऐसा लग रहा था जैसे फस्ट डे फर्स्ट षो हो। मूवी की जितनी तारीफ की जाए कम है। विद्या बालन की एक्टिंग जबरदस्त रही। कही से भी मूवी में ऐसा नहीं लगा कि कोई सीन या पार्ट बोरिंग हो। नसीरूद्दीन साहब और इमरान हाषमी इन सबने ने बेहतर अभिनय किया मगर विद्या बालन ने सबको मात दे दी। खैर अगर फिल्म की कहानी की बात करें तो अब हर कोई जान चुका है कि साउथ की हिरोइन विजयलक्ष्मी के जीवन पर आधारित है सो हर कोई देखना भी चाहता है कि आखिर ये स्लिक थी कौन, हर किसी के जेहन में उसको लेकर सवाल हैं, मगर गाने के प्रोमो से लेकर फिल्म तक फिर वही सवाल उठता है वलर्ग मूवी है फैमली के साथ नहीं देख सकते हैं मगर देखेंगे जरूर। इस मूवी में दिखाया गया कि जब कोई औरत सक्सेज के लिए किसी की परवाह नहीं करती और उसी पर भरोसा कर बैठती है जिसे बचपन से सपनों में देखा। जो कि उसके लिए मुसीबत बन जाता है। फिल्मी दुनिया में नया दौर ष्षुरू करने वाली विजयलक्ष्मी को अपने बिंदासपन की किमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है, जोकि आज हर...

what can do facebook yaar

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एक तरफ हमारी सरकार औेर प्रशासन हर संभव प्रयास कर रही है कि अपराध को जड़ से खत्म कर दिया जाए, मगर सच पूछा जाए तो कहीं न कहीं ये सब चोंचले बाजी ही है। इन दिनों रेलवे,सीबीआइ, पुलिस और प्रशासन हर कोई फेसबुक से जुड़ रहा है और जनता से ये भी अपील की जा रही है कि अपनी शिकायतें फेसबुक के जरिए प्रशासन तक पहुंचाए। अब ऐसे में सोचने वाली बात तो ये है कि क्या जिस देश में आदमी रो रो के अपनी जान दे देता है लड़की शोहदों के छेड़ने की शिकायती करती है तो  पुलिस सबूत मांगती है ऐसे में क्या फेसबुक पर दर्ज शिकायत की सुनवाई होगी, कतई नहीं हां ये जरूर है जिन नए लोगों की पुलिस में भर्ती हुई और उनको इंटरनेट की नॉलेज है उनका इंटरटेन हो  जाएगा, इसके साथ ही बिजी सिडयूल से थोड़ा सा वक्त अपने दोस्तों को जरूर दे सकेंगे। सरकार नया फरमान बहुत उम्दा है इसमें कोई शक नहीं है मगर कुछ लोग ऐसे भी है जो न इस ओर ध्यान देंगे न ही इन शिकायतों की कोई सुनवाई होने वाली है। प्रशासन की इस प्रयास से बहुत लोगों को इंटरनेट का ज्ञान हो जाएगा मगर शिकायतों की सुनवाई नहीं होने वाली अभी जो हाल है फिलहाल उससे तो यहीं उम्मीद की जा रही...

after all she urs

 शादी ऐसा रिश्ता जिसमें समाज परिवार हर कोई साथ होता है और दंपति के सुखी जीवन की कामना भी करता मगर समाज में कुछ ऐसे दंरिदें भी बैठे हैं, जिनकी शादी भी इंसानों के साथ हो जाती है खबरों में देखा की पूराकलंदर फैजाबाद में एक पति ने अपनी पत्नी को शक की चलते जान से मार दिया। इतना ही नहीं अपने खूब को भी खत्म कर दिया दयानंद नाम का ये आदमी है बीएससी पास मगर सोच शायद किसी जानवर की है तभी ऐसा कदम कोई उठा सकता है जानकर अजीब लगा की बीवी पर इतना शक हुआ की वो लखनउ से नौकरी छोड़कर घर जाकर जम गया। करीब एक महीने से घर में था और हर रोज पत्नी की धुनाई करता था हद तो तब हो गयी जब पत्नी ने इस बात का विरोध किया की बेवजह उसपर शक न करे और ज्यादा दिक्कत है तो उसे साथ लेकर रखे। फिर क्या बीवी ने साथ रहने को क्या कहा उससे उसे जान से मार दिया साथ चार बेटियों को भी मौत के घाट उतार दिया। जिसमें एक बच्ची 11 साल की थी, एक 9 ,7 और पांच साल की थी। हद तो तब हो गयी जब हत्यारे के भाई ने चीख सुनी तो घर में आया, जब बडे़ भाई ने सबसे छोटी बच्ची को बचाने की कोशिश की तो हत्यारे ने उन्हें कुल्हाडी लेकर दौड़ा लिया। इसके बाद गांवव...

दीपावली सबके साथ

आज हर ओर लोग छुटृटियों का लुत्फ ले रहे है मगर कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनका ऑफिस आज भी खुला मैं उनको दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं । इतना ही नहीं ऐसे सभी साथियों से निवेदन है कम मौज लेते हुए आज काम करें उदास न हों सच में बहुत सुकून मिलेगा। मीडिया में काम करने कारण आज मेरी भी छुटृटी नहीं है मगर मुझे इसका मलाल भी नहीं है मेरे ही जैसे लोग वो भी है जो मॉल, कॉल सेंटर और रेलवे में काम करते हैं उनको भी छुटृटी नहीं है सो हम सबको खुश होना चाहिए की हम अपने कीमती समय में से जनता को समय देते हैं उनके लिए कुछ करते है सही मायने में हम लोग सच्चे पब्लिक सर्वेंट है। जो खुद तो हंसते मगर दूसरों को हंसाकर । इसी के साथ दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं । दीपा श्रीवास्तव

रोशन है बचपन की दीपावली

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दो दिन बाद दीपावली है हर ओर तैयारी चल है कुछ लोगों के यहां तैयारी हो भी चुकी है। इस दौरान बच्चों में तो पटाकों और झालरों का क्रेज  रहता ही है साथ ही बड़ों में भी छुटृटी का मजा लेने का इंतजार होता है। आज जूडो का पहला टूर्नामेंट था सिल्वर मेडल जीत कर मैंने तो अपनी दिवाली जगा ली। आगे देखिए क्या होता है। बच्चों का लंबा चौडा हूजूम डालीबाग साइड पटाखों की खरीददारी के लिए जा रहा था साथ ही कुछ बच्चे अपने परिवार के साथ ढे़रों पटाखें लेकर वापस भी आ रहे थे। बच्चों का चहकता चेहरा देखकर अपना बचपन याद आ गया जब हम भी इन्हीं के जैसे हुआ करते थे और धमाके वाले पटाखें छोड़ना मेरा पैशन हुआ करता था। टीवी देखने का बहुत शौक था इसलिए रात में 12 बजे के बाद पटाखे नहीं जलाती थी क्योंकि टीवी पर देर रात तक पटाखा न जलाने के लिए विज्ञापन आता था। लेकिन इतनी रात तक तमाशा करने के बाद भी दूसरी रात का इंतजार हुआ करता था। कहते हैं न गुजरा हुआ जमाना वापस नहीं आता सो बचपन कहां से आ सकता है। आज पटाखे की खरीददारी करते वक्त भाई ने हजारों रूपए लगा दिए मैंने भी मना नहीं किया क्योंकि ये वो समय जो वापस नहीं आएगा। मगर वो छांट-...

आपका साथ अनमोल है

घर जाने की खुशी उस समय और ज्यादा महसूस होती है जब आप परिवार से दूर रह रहे हों। इन अनुभव की मैं खुद गवाह हूं जिंदगी का एक पूरा साल अपने भाई बहनों से दूर रहने का कटु अनुभव है। तो उनका दर्द बखूबी समझ में आता है जो इस दीपावली अपने परिवार के साथ नहीं रहेंगे। खैर अभी भी मम्मी पापा से कोसों दूर हूं और हर दीपावली उनके बिना ही मनानी पड़ती है मगर ज्यादा तकलीफ नहीं होती है क्योंकि उस दिन मेरा छोटा भाई या बहन मेरे साथ होते हैं। आज एक ऐसे आदमी को देखा जो परिवार की जीविका चलाने के लिए परिवार से दूर है और इस त्यौहार में घर जाने के लिए काफी खुश भी थे मगर जब अपने मालिक से छुटृटी मांगने गये तो उन्होंने इनकार कर दिया। परिवार में बूढ़ी मां, छोटा सा बेटा और बीवी इन सबको इस व्यक्ति के घर आने का जितना इंतजार है उससे कहीं ज्यादा इनको अपने परिवार के साथ ये खुशियों भरा पल बीताने का। मगर कहते हैं न , नौकरी है ही ऐसी चीज जो कभी न कभी परिवार से दूर करती जरूर है। बहरहाल घर जाने के लिए यह व्यक्ति अपने वीक ऑफ में भी काम करता है ताकि दो सप्ताह बाद दो दिन के परिवार के साथ रह सकें । मैं भी दैनिक भास्कर में यही किया कर...

सीएम का वेलकम

            एक इंसान के आने पर इतनी सुरक्षा व्यवस्था कि लग रहा था मानों उनको किसी की नजर लग जाएगी। यहां ये कहना गलत नहीं होगा कि सीएम की सुरक्षा को लेकर प्रशासन मुस्तैद था इसलिए शायद हर चार कदम पर पुलिस तैनात थी। खैर शुक्रवार को शहर में सीएम पुलिस लाइन में आ रही उस दौरान पुलिस प्रशासन पूरी तरह सक्रिय था। मालूम पड़ रहा था सड़क पर इंसान दिखा तो पुलिस वालों की नौकरी चली जाएगी। मीडिया को सीएम के आने की खबर थी मगर आम आदमी इससे अंभिज्ञ था तभी सुबह के 8.30 बजे हर कोई अपने रूटीन वर्क के लिए बाहर निकल पड़ा था। कोई हनुमान सेतु मंदिर जाना चाह रहा था तो किसी को नौकरी बचाने के लिए अल सुबह ऑफिस पहुंचना था। मगर इन सब के बीच यूपी की मुखिया का आना किसी बारात से कम नहीं था। हर कोई बारात के स्वागत में मशरूफ नजर आया। अजीब तो ये लग रहा था कि लोगों को सड़क से हटाया तो जा रहा था मगर उनको छुपाया भी जा रहा था ताकि वो सीएम की गाड़ी न देख सकें। ऐसा क्यूंह ै इस बारे में जब एक पुलिस सुरक्षा बल से पूछा तो जवाब मिला ताकि किसी को शक न हो कि ये यहां क्यों खड़ा है अगर किसी अधिािरी ने ए...