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                                              मत कीजिये ऐसा कितना अजीब सा लगता है.जिन बच्चो को माँ बाप इतने प्यार और दुःख दर्द से पलते है. उनको अपने हांथो से ही मार देते है.जो माँ अपने जिगर के टुकड़े के लिए रात-रात भर जगती है;उसे भूख से तडपता नहीं देख  पाती है.उसी की छोटी सी ख़ुशी के लिए उसका गला घोट कर मार देती है,क्युकी जिदगी का सबसे अहम् फैसला वो खुद से कर लेते है. क्या ये ठीक है? जब आप अपने बच्चे को मर्जी का खाने की इजाजत देते है.कपडे पहनने की इजाजत देते है तो शादी मर्जी की क्यों नहीं? क्या अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनना गुनाह है.निरुपमा ने ऐसा कोई काम नहीं किया था की उसे उसकी जान गवानी पड़े.अरे जिसकी हम पूजा करते  है उस भगवान ने भी तो प्रेम किया था.उसे जब हम पूजते है तो इन्सान को मार क्यों दिया जाता है.हर जन्माष्टमी...
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 गुलमोहर एक दौर था जब बागो में कोयल की कु कु होती थी; तपती धूप में जब हम उन बागों में घूमा करते थे, आम के पेंड़ से हम टिकोरे तोड़ा करते थे, वो लू के थपेड़ो में धमा चोकड़ी भरना, डाली- डाली पर कूद कूद कर खेलना, जब कल देखा कुछ बच्चो को आंधी में, वो बीन रहे थे फूल गुलमोहर के, तेज हवाएं बहती थी, रहता था आंधी का इंतजार, डाली हिलती थी हम दौड़ते थे, पेंड़ो के नीचे कब टपकेगा वो, हम निहारते सब पेड़ो को, अब गांव नहीं  है न बचपन है, न ही आमो की डाली है, गली में एक पेंड़ गुलमोहर का, जिसके फूल बीनते बच्चे है, दीपा
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after releasing  wake up sid this one is the trend of photo graphy. Ranveer kapoor all time cliking pic of  his feet . this is not quit new but we can call it new trend. why only feet because they help us to move here and there and help us to reach. deepa srivastava
आसंतुष्ट आदमी इन्सान को लोग कितना महान मानते है क्युकी वो सारे काम कर सकता है.ऐसा कुछ नहीं है जो इन्सान न कर सके मगर ये इन्सान कभी संतुष्ट नहीं रहता हमेशा कुछ न कुछ मांगता ही रहता है,अभी दो महीने पहले ठण्ड पड़ रही थी सब लोग परेशां धुप नहीं निकल रही है,हाय कितनी ठण्ड है मगर अब जब कड़ाके की धुप निकल रही है तो छाव की चिंता सताने लगी,अब लोग ये कहते नज़र आ रहे है हाय कितनी तेज़ धुप है छाव हो जाती तो अच्छा रहता.शायद इसीलिए ऊपर वाला इन्सान की परीक्षा लेता रहता है,क्युकी हम इन्सान संतुष्ट हो ही नहीं सकते.और न ही चीजो का महत्त्व समझ सकते है,हमे तो सब अपने मन मुताबिक चहिये,अब चाहे वो मोसम हो या और कुछ.  कहते है किसी चीज का अत्य नहीं होना चहिये. दीपा
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 क्या करे औरत ? आज कुछ अनोखा नहीं बल्कि वही पुरानी बात लिख रही हु जो कभी हमारे बाबा दादा कहते थे. की लडकिया घर में जयादा अच्छी लगती है. ऐसी ही सोच आज के युवा की भी वो खुद तो नोकरी करना कहते है पर ये नहीं चाहते की उनकी बीबी भी जॉब करे. वो सिर्फ एक गृहणी हो जो उनका परिवार देखे उन्हें देखे पर खुद के सपनो को छोड़ दे. मतलब अपने सपने और जज्बात को स्वाहा कर दे. उसने क्या चाहा ये मतलब नहीं है . अगर वो भी जॉब करेगी तो जिन्दगी में खुशिया नहीं रहेगी ये मानना है कुछ युवा का. ये आज पता चला लोगो की बात सुन के.आज भी औरत अपनी जिन्दगी नहीं जी सकती है ये है बदला युवा आज का युवा.
महिला आरक्षण बिल 14  साल से एक ही बिल के पीछे लोग भागते आ रहे है मगर अब राज्य सभा से पास होने के बाद लोक सभा के ठेकेदारों ने इसके लिए बवाल काटना शुरू कर दिया.वैसे तो सारे लोग नारी को जीवन का आधार मानते है.पर जब बात राजनीती की आई तो सबने हाथ खड़े कर लिए ऐसा क्यों.? क्या लोग महिला के विकास से जलते है. या महिला सिर्फ चूल्हे चोके तक ही महिला को सिमित रहना चाहिए? सारे लोग मानते है महिला के बिना हर पुरुष का जीवन अधुरा है तो समाज में और राजनीती में उनकी सह भागिती को लेकर इतना हल्ला क्यों है? अगर औरत एवरेस्ट की छोटी पर  जा सकती है,मुख्या मंत्री बन सकती है आसमान की सैर कर सकती है तो राजनीती भी संभल सकती है.कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जहाँ औरत का बोलबाला न हो.इसिलए राजनीती में भी उसे आरक्षण मिलना चहिये. दीपा
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क्या यही पत्रकारिता है? मुझे पता इसे पढ़ कुछ लोगो को बुरा लगेगा...... हम सब ये जानते है की क्या है हमारा फर्ज़.सबसे ज्यादा मजबूत पक्ष पत्रकारिता जिसे अमिताभ बच्चन की फिल्म में साफ़ दिखा दिया गया. रण एक ऐसी फिल्म जिसे हर पत्रकार को देखनी चाहिए. यक़ीनन ये उन्हें उनका फर्ज़  दिला देगी.जो की अब बिजनेस का रूप ले चूका है.अखबार विज्ञापन के लिए परेशां है. टी.वी चेनल टी.आर.पी और इन सब के बीच पिसता है आम आदमी. क्या पत्रकारिता पैसे के लिए की जाती है.? और पैसा किस हद तक इन्सान को गिरा सकता है ये सब है इस फिल्म में. विजय हर्ष वर्धन मालिक(बच्चन) जो की एक जाने माने कर्त्यव्य निष्ठ पत्रकार होते है.इनका चेनल एक मात्र ऐसा चेनल होता है.जो सिर्फ सच्ची खबर ही दिखाता है.जो टी.आर.पी. से ज्यादा देश की सेवा और मीडिया का फर्ज़ निभाने में यकीं रखता है. ये तो हम आप सब जानते है जो सच कहता जो बिकता नहीं उसके साथ बस गिने चुने लोग ही होते है.ऐसा ही कुछ हर्ष वर्धन मालिक है.उनका चेनल घाटे में रहता है.बेटे को ये बात बहुत बुरी लगती...