यूं जिंदगी चलती है



जिंदगी भी अजीब है कभी हमें इतनी खुशियां मिलती है कि हमें महसूस होता कि हमसे खुश दुनिया में कोई है ही नहीं, और कभी ऐसा महसूस होता है कि इतना दुख है कि अब दुनिया में हमारे लिए कुछ बचा ही नहीं। इन सबके बाद भी जिंदगी चलती है और जिंदगी से मायूस लोग भी मौत को मात देकर जिंदगी की नदी में छलांग लगा देते हैं। ऐसा ही कुछ वाक्या कल सामने आया। सेल पर एक मैसेज आया जो अननोन नंबर से था उसमें किसी का नाम भी नहीं था ऐसे में थोड़ी परवाह हुयी कि आखिर ये है कौन। मैंने रिप्लाय करते हुए पूछा हू आर यू मेरा मैसेज डिलीवर हुआ तो उधर से कॉल आ गयी। दरअसल कुछ दिन पहले मेरा सिम ब्लॉक हो गया ऐसे में जितने भी कॉन्टेक्ट मेरे पास थे वो खत्म हो गए क्योंकि सिम रिप्लेश करते वक्त मैंने नंबर कॅपी ही नहीं किया। खैर जैसे कॉल आयी मैंने पूछा कौन इतने में उधर से जवाब आया नमस्ते दी मैंने भी नमस्ते कहते हुए ही सवाल दाग दिया कि आप कौन हैं मैं पहचान नहीं सकी। उसने कहा दी मैं प्रदीप, ये वो लड़का है जो जूड़ो में मेरा पाठर्नर होता है क्योंकि मेरी वेट में एक लड़की और एक लड़का है जिसके साथ मुझे इंनिंग करनी होती है। प्रदीप से बात करते वक्त हमेशा की तरह मैंने घरवालों की खैरियत पूछ ली साथ ही ये उसे चिढ़ा भी दिया कि और बताओ भाभी से बात की या नहीं। मैंने जैसे उसे चिढ़ाया उसकी आवाज बदल गयी जब पूछा क्या हुआ तो मालूम चला कि प्रदीप के भैया ने सुसाइट कर लिया। इतना सुनके ऐसा लगा जैसे मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी जो उससे ये सवाल पूछ लिया। पिछले दो महीने से मैं जूडो नहीं गयी ऐसे में वहां के लगभग सभी बच्चों की कॉल आती थी प्रदीप की सबसे ज्यादा मगर पिछले महीने से उसकी कॉल आनी बंद हो गयी और मैसेज भी, मैंने उसे गिने चुनी बार ही कॉल करीं होगी वो भी तब जब मुझे कोई काम रहा हो। मेरे साथ सबसे बढ़ी कमी है कि मैं किसी को हर रोज या यूंह ी फोन नहीं करती शायद ये मेरी बुरी आदत है और इसी का नतीजा है कि मुझे बहन कहने वाले के साथ इतना कुछ हो गया और मुझे बहुत देर में पता चला। अपनी इस आदत से मुझे खुदपर बहुत अफसोस हुआ ।प्रदीप जब भी क्लास में आता था तो भैया की शादी के उत्साहित रहता और रोज ही सबको कहता सब लोग आना इसके बाद मेरे पास आके बोलता दी आप तो नहीं आएंगी ये मैं जानता हूं लेकिन आप नहीं आईं तो भैया के शादी के दिन मैं आपके ऑफिस आकर आपसे लडूंगा। मैं जानती थी मैं उसके घर नहीं जा सकती है फिर उसे तसल्ली देती कोशिश करूंगी। मगर आज उसकी आवाज बिल्कुल शांत थी कोई चहक नहीं थी मैंने उससे माफी मांगी तब उसने यही कहा दी मुझे मालूम आप बहुत व्यस्त रहती हैं। परिवार में छोटा होने के बाद महज 15 साल की उम्र में उसपर पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ गयी अब ईश्वर से यही प्रार्थना है कि जैसे उसके कमजोर कंधे पर ये बोझ डाल दिया है तो साथ में उसे एक बेहतर इंसान बनाएं और उसे जीवन की कठिनाइयों से निपटने की शक्ति दें। प्रदीप जूडो का चैम्पियन है ईश्वर उसे जिंदगी में भी वही रूतबा दें।

दीपा श्रीवास्तव

Comments

S.N SHUKLA said…
सार्थक पोस्ट, सादर.
कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधार कर स्नेह प्रदान करें.

Best one

अब तो जागो