सफर .......... जिन्दगी का
एक समय वो था जब एक लड़की अपने पेपर देने के लिए भी घर  से दूर नहीं जाना चाहती  थी.कहीं भी जाना हो माँ को होना जरुरी है. फिर चाहे वो पेपर देना हो या कहीं रिश्तेदारों के घर जाना हो.अगर मम्मी है तो जाना है वरना नहीं.बचपन से आखों में एक सपना था की कुछ करना है कुछ बनना है मगर घर से दूर रह कर नहीं.उसे क्या पता था की दुनिया की रेस में आगे निकलना है तो माँ घर परिवार सबसे दौर जाना होगा.बात तब की है जब उसे स्नातक की परीक्षा के पहली बार माँ को छोड़ कर जाना पड़ा एक  महिना पहले से ही रोना धोना शुरू, खाना पानी बंद जैसे माँ कहे बेटा रोते नहीं थोड़े दिन की बात है फिर वापिस आ जाओगी .लेकिन उसका एक ही जवाब रहेंगे? अब इस पर माँ बेटी दोनों का विलाप शुरू हो जाता.वहीँ पापा मजा लेते की ये  शादी करके कैसे जियेगी.उसका भी जवाब हाज़िर था.लड़की कहती मुझे नहीं करनी शादी अगर करोगे तो आप और मम्मी जाओगे "मै नहीं".किसी तरह ये सारा समय बीत गया मगर माँ से दौर रहने की आदत नहीं सीखी.मगर आज वही लड़की घर हजारो किलो मीटर दूर अपने परिवार से माँ अलग है.क्युकी अब बचपना नहीं रहा.साथ ही कुछ चीजे जीवन में ऐसी आती है जिनको पाने के लिए सबसे दूर जाना पड़ता है.पर शायद वो चीज जिसके लिए अपना घर छोड़ा वो उसे मिले या उसके लायक हो. 

Comments

Sneha said…
Ho sakta hai Deepa jo cheez apke liye itni ahmiyat rakhti hai wo is layak bhi ho aur apko mile bhi, par jo cheez bohot pyari hoti hai use bohot sambhal kar aur sahej kar rakhna padta hai, aur samay samay par use ye ahsaas dilana padta hai ko wo kya mahatva rakhta hai apki life me...!
thik kha seneha,mgr a shart sirf uske liye hi kyu? a us k liye b honi chaiye jiske liye log sbkuch chor dete hai.
Sneha said…
Sharton par zindagi nahi ji ja sakti deepa ji, shayad use apko ye mahsoos karane bhar ki deri ho ki wo kya ahmiyat rakhta hai apke liye aur dekhiyega kaise khushiyan hanste hue apke daman ko bhar deti hai.

Best one

अब तो जागो